Thursday, June 9, 2011

मान. महादेवजी जानकर का गुजरात दौरा.....

राष्ट्रीय समाज पक्ष के अध्यक्ष मान. महादेवजी जानकर का गुजरात दौरा.....

गुजरात -वडोदरा, (दि. -०६-२०११)

भारत के सत्ता और संपति से वंचित (.बी.सी. ५२ %, एस.सी. १५%, एस.टी. .५०%, धर्मांतरित अल्पसंख्यांक १०.५०%) लोगों को इस देश का शासक बनाने के लिये अपना जीवन होड में लगाने वाले 'राष्ट्रीय समाज पक्ष' के संस्थापक, अध्यक्ष मान. महादेवजी जानकर अपनी कार्यशैली के मुताबिक गुजरात में अपने पक्ष की परिस्थिती की जानकारी हांसिल करने के लिये पधारे थे.

वडोदरा स्थित हॉटल सागर लेकव्यु मे उन्हों ने अपने पक्ष के पदाधिकारी, शहर के प्रतिष्ठित नागरिक समूह की मुलाकात की. मिडिया के प्रतिनीधियों से औपचारिक बातचीत करते हुए आपने बताया की वे अपने पक्ष के पदाधिकारियों का हौसला बढाने के लिये और मार्गदर्शन हेतु आये है. देश का राष्ट्रीय समाज लाचारी की अवस्था में दम भर रहा हैं. जब कि एक छोटा सा अल्पजन शोषक समाज इस एक समय में 'सोने की चिडिया' कहलाने वाले भारतवर्ष की सत्ता और संपत्ति के उपर कब्जा जमाये हुए हैं. लोकतंत्र नाम मात्र का है. मेरा पक्ष राष्ट्र के आम इन्सान को सत्ता और संपत्ति में सहभागी बनाने के लिए संघर्षरत है. ३१ मई को चौंडी (महाराष्ट्र) में 'युवा शक्ति चेतना रॅली' समापन और प्रजावत्सल कुशल शासक राजमाता अहिल्यादेवी होळ्कर की २८६वि जन्मजयंति कार्यक्रम के आयोजन के बाद उनका यहां आना हुआ है. देश में प्रस्थापित वर्ग अपनी सत्ता बचाने हेतु सामान्य लोगों का दैनंदिनी प्रश्नों से ध्यान हटाने के उद्देश्य मात्र से 'काला धन वापसी - भ्रष्टाचार निर्मूलन' जैसे आंदोलन का सहारा ले रहा है. लेकिन राष्ट्र का जागृत राष्ट्रीय समाज उनकी मैली मुराद पूरी नहीं होने देगा. आपने गुजरात की राष्ट्रीय प्रजा की सच्ची प्रगति और स्वातंत्र्य के आविर्भाव के लिये शुभेच्छा व्यक्त की.

इस अवसर पर राष्ट्रीय समाज पक्ष, गुजरात के अध्यक्ष मान. ललितभाई पटेल, महासचीव ऍड. संजय वाघमोडे, वडोदरा शहर-जिल्हा अध्यक्ष मान. प्रकाश शर्मा, महिला अध्यक्ष मान. जयमाला आरकोट, मान. देवहुती राजेशिर्के, मान. सकपाळ वगैरह ने मान. जानकरसाहब और मुंबई से पधारे प्रदेशाध्यक्ष मान. विश्वनाथजी पाटील का उष्मायुक्त स्वागत किया और चर्चा में सहभाग लिया.

वडोदरा शहर के नागरी प्रश्न और राज्यस्तर पर पक्ष के कार्य के विस्तार, सदस्यता बढाने के लिये सक्रियतापूर्वक प्रवृत्ति हाथ धरने का निर्णय लिया गया. महासचीव ऍड. वाघमोडे द्वारा इस प्रसंग को सफल बनाने में योगदान देनेवाले सभी लोगों के आभार प्रदर्शन के साथ उत्साहजनक वातावरण में इस कार्यक्रम का समापन हुआ.

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